प्रेम की परिभाषा तो न झुठलाओ!
तुम्हे
मुझसे प्रेम है
या
मेरे स्वभाव से
इतना तो
तय कर लिया होता
प्रेम की
परिभाषा तो
अपने आप में ही
सम्पूर्ण है
इसलिये प्रेम
टुकड़ों में नहीं होता
इतना तो
समझ लिया होता
इसीलिये तो
कहता हूँ
कि
पहले मन का
ये संशय तो
दूर कर लो
कि
तुम्हे
मुझसे प्रेम है
या
मेरी बुराईयों से
परहेज है
तुम्हे ग़र
मेरी बुराईयों से
गुरेज़ है
तो
ये तो बता दो
इन्हे मैं कहाँ छोडूँ
कैसे मैं
अपने अंतस से ही
नाता तोडूँ
यदि
मुझे अपनाना है
तो
सम्पूर्ण अपनाओ
पर
प्रेम की परिभाषा
तो न झुठलाओ
न खुद बहको
न मुझको बहकाओ






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