मेरी खुशी !
मैं खुश हूँ
तुमने मुझको
मेरी कमियों से
अवगत तो कराया
मुझे
मुझसे ही
परिचित तो कराया
तुम्हारा तात्पर्य तो
कुछ और ही था
पर अनजाने ही
तुमने मुझे
इक रास्ता तो दिखाया
कि
मै स्वयँ को
स्वयँ से
कैसे जीत पाऊँ
अपने
अंदर-बाहर को
कैसे रीत पाऊँ
ये सब
मुझे
तुम्हारी बात से ही तो
समझ में आया
पर
तुम्हारी उस पंगु सोच का
क्या करूँ
जो तुम्हे
केवल मेरी
कमियों के बारे में ही
बताती है
और
तुम्हे अपने बारे में
कुछ नहीं जताती है
मैं तो
विजय पा ही लूँगा
किसी तरह
स्वयँ पर
पर तुम
खड़े ही रहोगे
जिंदगी के इस मोड़ पर
इसी मोड़ पर !






4 Comments:
सही लिखा है। बहुत सकारात्मक सोच लिए हुए है।
घुघूती बासूती
achchi kavita hai
बहुत बढिया.
सही जीवन दर्शन है ।
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