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कुछ तो मैं कह बैठा हूँ, अभी बहुत कुछ बाकी है,

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"मेरी अभिव्यक्तियों में सूक्ष्म बिंदु से अन्तरिक्ष की अनन्त गहराईयों तक का सार छुपा है इनमें एक बेबस का अनकहा, अनचाहा प्यार छुपा है " -डा0 अनिल चडडा All the content of this blog is Copyright of Dr.Anil Chadah and any copying, reproduction,publishing etc. without the specific permission of Dr.Anil Chadah would be deemed to be violation of Copyright Act.

Friday, April 24, 2009

"गज़ल"

मँझधार की आदत हो ही गई,
किनारों से अदावत हो ही गई ।

जब से दोस्त हुए दुश्मन,
दुश्मन संग दावत हो ही गई ।

थी लाख करी कोशिश हमने,
पर ग़म से चाहत हो ही गई ।

जब मिला दोगला सारा जहाँ,
दुनिया से बगावत हो ही गई ।

निकले तो थे गुल की खातिर,
ख़ारों से कुर्बत* हो ही गई ।

मुँह बेशक फेर के चल दें वो,
अँखियों से कयामत हो ही गई ।

न याद करूँ, न भूलूँ उन्हे,
यूँ दिल की हालत हो ही गई ।

शामो-सहर घर सूना मिले,
अब ऐसी किस्मत हो ही गई ।

राहें दिल की पथरीली हुईं,
ऐसी कुदरत ये हो ही गई ।

* नजदीकी

7 Comments:

Blogger gargi gupta said...

bhut acchhi rachna
dil tak mahsus kar saki

gargi

4:59 PM  
Blogger डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

नमस्कार,
इसे आप हमारी टिप्पणी समझें या फिर स्वार्थ। यह एक रचनात्मक ब्लाग शब्दकार के लिए किया जा रहा प्रचार है। इस बहाने आपकी लेखन क्षमता से भी परिचित हो सके। हम आपसे आशा करते हैं कि आप इस बात को अन्यथा नहीं लेंगे कि हमने आपकी पोस्ट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।
आपसे अनुरोध है कि आप एक बार रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को देखे। यदि आपको ऐसा लगे कि इस ब्लाग में अपनी रचनायें प्रकाशित कर सहयोग प्रदान करना चाहिए तो आप अवश्य ही रचनायें प्रेषित करें। आपके ऐसा करने से हमें असीम प्रसन्नता होगी तथा जो कदम अकेले उठाया है उसे आप सब लोगों का सहयोग मिलने से बल मिलेगा साथ ही हमें भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा। रचनायें आप shabdkar@gmail.com पर भेजिएगा।
सहयोग करने के लिए अग्रिम आभार।
कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
शब्दकार
रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

5:08 PM  
Blogger mehek said...

waag behtarin

5:09 PM  
Blogger "अर्श" said...

bahot khub likhaa hai aapne achhi gazal... badhaayee aapko...


arsh

5:12 PM  
Blogger परमजीत बाली said...

बहुत बढिया रचना है।बधाई।

जब मिला दोगला सारा जहाँ,
दुनिया से बगावत हो ही गई ।

6:48 PM  
Blogger अविनाश वाचस्पति said...

ग़ज़ल पूरी तरह भावों के जल से

सराबोर है।

7:36 PM  
Blogger Udan Tashtari said...

क्या बात है भाई साहब!! आजकल एक से एक रचना उतर रही हैं. शुभकामनाऐं.

9:04 PM  

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