"मेरी कविता का दर्द!"
मन ने
कुछ शब्द
बुदबुदाये
कविता बन गये
भावों की
सरिता बन गये
शब्दों में
मन की व्यथा
उकेर कर
कहीं से कुछ
कहीं से कुछ
ले लेता हूँ
और सभी कुछ
शब्दों को
दे देता हूँ
मैं ही क्यों झेलुँ
सारी व्यथा
शब्दों के द्वारा
कुछ तुम्हें भी
दे देता हूँ
भार उठाते-उठाते
कमजोर पड़ चुके
अपने काँधों का
कुछ भार
तुम्हें भी दे देता हूँ
तुम भी तो
कुछ भार सहो
मेरे शब्दों की
मार सहो
फिर अगर
कह सको तो कहो
मैंने क्या पाया
क्या खोया है
तुमने क्या पाया
क्या खोया है
मेरी कविता ने
जो दर्द बोया है
उसे कम से कम
तुम्हारी आँखों ने
नमी में तो
पिरोया है !




chunindikahaniyan.blogspot.com
Read in your own script
Roman(Eng)
Gujarati
Bangla
Oriya
Gurmukhi
Telugu
Tamil
Kannada
Malayalam
Hindi
Via chitthajagat.in
anilchadah.blogspot.com
"मेरी अभिव्यक्तियों में सूक्ष्म बिंदु से अन्तरिक्ष की अनन्त गहराईयों तक का सार छुपा है इनमें एक बेबस का अनकहा, अनचाहा प्यार छुपा है " -डा0 अनिल चडडा All the content of this blog is Copyright of Dr.Anil Chadah and any copying, reproduction,publishing etc. without the specific permission of Dr.Anil Chadah would be deemed to be violation of Copyright Act.
3 Comments:
बहुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति है और मेरे पास शब्द नहिं है मेरे शब्दों से परे एक सुन्दर कविता आभार्
chadda saaheb,
aapki style toh gazab ki hai hi....
baat bhi gazab ki hai
mujhe toh shak ho rahaa hai shaayad aap aadmi bhi gazab k hi honge
___________________mazaa aayega
___________________aapse mil kar !
BADHAAI ! ACCHI( KAVITA K LIYE
बहुत उम्दा बात कही.
Post a Comment
<< Home